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पाकिस्तान का नया सामरिक संकेत — बलजीत गिल


पाकिस्तान का नया सामरिक संकेत

लेखक: बलजीत गिल · प्रकाशित:

पश्चिमी सीमा से लगातार मिल रही नाकामियां और पिछले युद्धों के कड़वे तज़रबों से आहत पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर एक नया मोर्चा खोलने की फिराक में हैं।

नई दिल्ली के रणनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान की सैन्य व राजनीतिक नेतृत्व द्वारा अपनाई गई नीतियों और सीमावर्ती कार्रवाइयों ने दक्षिण एशिया में सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित किया है। इन परिस्तिथियों में जनरल आसिम मुनीर की हाल की गतिविधियाँ और बयानों को नई रणनीतिक दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पश्चिमी सीमा से लगातार मिली नाकामियों और पिछले युद्धों के अनुभवों से आहत पाकिस्तान एक नया मोर्चा खोलना चाहता है — यह वही संदेश है जो हालिया कतिपय संकेतों से निकला है।

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पाकिस्तान ने वाकई अपनी सैन्य नीति में बदलाव किया है, तो इसके भौगोलिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर गहरे प्रभाव दिखाई देंगे। इसमें सीमा-रेखा पर हलचल, जासूसी-जानकारी का आदान-प्रदान, तथा क्षेत्रीय गठजोड़ों में फेरबदल शामिल हो सकते हैं।

नई दिल्ली में सुरक्षा तंत्र सतर्क है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों के तकरार, सूचनाएं और सीमा पर हुई घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी नए कदम का जवाब काफी तेज और योजना बद्ध होगा।

क्षेत्रीय निहितार्थ

अगर पाकिस्तान ने रणनीति में बदलाव किया तो इसका असर केवल सैन्य लड़ाई पर नहीं होगा, बल्कि मीडिया, कूटनीति और अर्थनीति पर भी दिखेगा। पड़ोसी देशों के साथ व्यापार तथा ऊर्जा परियोजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका भी अहम होगी।

निष्कर्ष

अंततः, वर्तमान संकेतों का अर्थ निकालना और भविष्य की योजना बनाना बेहद जटिल प्रक्रिया है। नीति निर्माणकर्ताओं को ठोस सूचनाओं के आधार पर ही कदम उठाने चाहिए — वरना अनियोजित प्रतिक्रियाएँ क्षेत्रीय स्थिरता को और कमजोर कर सकती हैं।

© लेखक: बलजीत गिल

स्रोत: भविष्य-भारत / अनौपचारिक रिपोर्ट